स्वाति नक्षत्र ज्योतिष रहस्य
आज की हमारी चर्चा स्वाति नक्षत्र पर केंद्रित है। इसे मारुत, समीर और वायु नाम से भी पुकारा जाता है। यह आकाश मण्डल में मौजूद पन्द्रहवाँ नक्षत्र है जो १८६.४० डिग्री से लेकर २०० डिग्री तक गति करता है। स्वाति नक्षत्र के स्वामी राहु, नक्षत्र देवता वायुदेव और राशि स्वामी शुक्र देव हैं। यदि आपके कोई सवाल हैं अथवा आप हमें कोई सुझाव देना चाहते हैं तो आप हमारी वेबसाइट पर विज़िट कर सकते हैं। आपके प्रश्नों के यथा संभव समाधान के लिए हम वचन बद्ध हैं।
स्वाति नक्षत्र वैदिक ज्योतिष में
स्वाति नक्षत्र आकाश मण्डल में मौजूद एक तारा है। इसका प्रतीक चिन्ह वायु के झोंके के प्रभाव में नव अंकुरित पौधा है। स्वाति नक्षत्र के स्वामी राहु हैं और यह नक्षत्र तुला राशि में ६.४० डिग्री से २० डिग्री तक गति करता है। इस नक्षत्र के देवता वायुदेव हैं। स्वाति नक्षत्र के जातकों के जीवन पर राहुव्शुक्र देव का प्रत्यक्ष प्रभाव देखा जा सकता है।
नक्षत्र स्वामी : राहु
नक्षत्र देव : वायुदेव
राशि स्वामी : शुक्र
विंशोत्तरी दशा स्वामी : राहु
चरण अक्षर : रु, रे, रो, ता
वर्ण : शूद्र ( कसाई )
गण : देव
योनि : महिषी ( भैंसा )
नाड़ी : अन्त्य
पक्षी : कबूतर
तत्व : अग्नि
प्रथम चरण : गुरु
द्वितीय चरण : शनि
तृतीय चरण : शनि
चतुर्थ चरण : गुरु
वृक्ष : अर्जुन
बीज मंत्र : ॐ लं अथवा ॐ क्षं
रोहिणी नक्षत्र ज्योतिष रहस्य
स्वाति नक्षत्र जातक की कुछ विशेषताएं व्जीवन इस नक्षत्र के जातक पतले, समय के साथसाथ मांसल और हृष्ट पुष्ट होते हैं। ये आकर्षक व्यक्तित्व के स्वामी और संवेदनशील तथा भावुक होते हैं। ऐसे जातकों पर स्त्रियां आसानी से मोहित हो जाती हैं। आपमें गजब की ऊर्जा होती है और आप निरंतर कार्यरत रहते हैं। आप स्वतंत्र विचारक होते हैं। अपनी बात पर खड़े रहते हैं। इन वजहों से इनको अड़ियल भी समझ लिया जाता है। ये केवल रचनात्मक आलोचना पसंद करते हैं। यदि आपने इनकी आलोचना की है और उसमे रचनात्मकता नहीं है तो ये आपको ज़िंदगी भर याद रखेंगे। ध्यान देने योग्य है की राहु नक्षत्र स्वामी है जो शिव भक्त हैं। ऐसे जातकों का मूल उद्देश्य मोक्ष को उपलब्ध होना होता है, इस तथ्य का अहसास इन्हें यदा कदा होता भी रहता है। एक बार सही दिशा मिल जाने पर ये पीछे मुड़कर नहीं देखते इनमे भौतिक व् आध्यात्मिक दोनों प्रकार की उन्नति प्राप्त करने की पूर्ण क्षमता होती और नक्षत्रों की तरह स्वाति नक्षत्र के जातक भी अपने उत्थान के बारे में, अपनी उन्नति के बारे में अवश्य सोचते हैं। इनमे भावुकता प्रचुर मात्रा में होती है। एक बार यदि आप इनके मित्र हो गए तो यकीन मानिये ये जीवन भर आपका साथ देंगे। आपकी सहायता के लिए ऐसे जातक किसी भी हद तक जाएंगे। ये किसी किस्म का सोच विचार नहीं रखते, फायदे नुक्सान की बात सोचे बिना, निस्वार्थ भाव से अपने प्रियजनों की सहायता करते हैं। ऐसे ही यदि किसी वजह से यदि आप इनकी आँखों में खटक गए तो ये औपचारिकता निभाने में भी विश्वास नहीं रखते। किसी किस्म की डिप्लोमेसी नहीं करेंगे। इनके हाव भाव से साफ़तौर पर प्रतीत होता है की ये आपका सम्मान नहीं करते और आगे भी इसकी कोई संभावना नहीं है। जितनी शिद्दत से ये प्रेम करते हैं उतने ही दम से शत्रुता भी निभाते हैं। जीवन के ३१ वर्ष के बाद उन्नति करते हैं।
स्वाति नक्षत्र के जातक/ जातिकाकीमैरिडलाइफ
इस नक्षत्र में जन्मे जातकों की मैरिड लाइफ में उतार चढ़ाव लगातार बने रहते हैं। इनका वैवाहिक जीवन सुखी नहीं होता है। ये ऐसा दिखाते ज़रूर हैं की ये खुश हैं और इन्हें एक आदर्श जीवन साथी का साथ प्राप्त है लेकिन वास्तविकता में इससे उलट ही होता है। इस नक्षत्र की जातिकाओं का वैवाहिक जीवन भी एक तरह का समझौता ही होता है। क्यूंकि ये
गुणी होती हैं, संवेदनशील व्धार्मिक होती हैं इसलिए सामाजिक तौर पर ज़ाहिर नहीं करतीं की इनका वैवाहिक जीवन सुखी नहीं है। अपनी मैरिड लाइफ को बचाने में ही बेहतरी समझती हैं। समाज में खूबमान अर्जित करती हैं।
स्वाति नक्षत्र जातक का स्वास्थ्य
दिल से सम्बंधित रोग होने की संभावना अक्सर रहती है। रोजाना बीज मन्त्र का १०८ बार उच्चारण करें आपकी रोग प्रति कारक क्षमता में वृद्धि होती है, मानसिक तनाव दूर होता है, सफलता मिलने में सहायता प्राप्त होती है। अर्जुन के पेड़ से निर्मित औषधि ह्रदय रोग को दूर करती है।
स्वाति नक्षत्र जातक शिक्षा व्व्यवसाय
स्वाति नक्षत्र के जातक/जातिका संवेदनशील होते हैं, बहुत उम्दा एक्टर (अभिनेता) होते हैं। ड्रग्स अथवा शराब से सम्बंधित व्यापार कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त शेयर बाज़ार और सोने चांदी से सम्बंधित बिज़नेस भी कर सकते हैं।